May 27, 2022
आरोपी को छोड़ने के लिए ढाई लाख मांगना टीआई और एसआई को पड़ा भारी, दोनों को सजा

आरोपी को छोड़ने के लिए ढाई लाख मांगना टीआई और एसआई को पड़ा भारी, दोनों को सजा

एसआई ने रिश्वत मांगी, टीआई ने रचा षड्यंत्र, अदालत में हुआ सिद्ध
ग्वालियर। भ्रष्टाचारी तत्कालीन टीआई निर्मल जैन और एसआई नागेन्द्र सिंह भदौरिया को विशेष कोर्ट ने ढाई लाख फिर दो लाख रूपए की रिश्वत मांगे जाने के अपराध में दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ने सहआरोपी तत्कालीन टीआई निर्मल जैन को भादसं की धारा 120 बी के अपराध में दो साल के सश्रम कारावास तथा धारा 201 के अपराध में एक साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। जैन पर कुल चार हजार रूपए का जुर्माना भी किया गया। वहीं मुख्य आरोपी सब इंसपेक्टर नागेन्द्र सिंह भदौरिया को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात के अपराध में दो साल का सश्रम कारावास, धारा 120 बी के अपराध में दो साल का सश्रम कारावास, धारा 201 के अपराध में एक साल का सश्रम कारावास सुनाया गया है। आरोपी पर कुल छह हजार रूपए का जुर्माना भी किया गया है;
जिला लोक अभियोजन अधिकारी लोकायुक्त संगठन ग्वालियर श्रीमती राखी सिंह के द्वारा प्रकरण की जानकारी देते हुए बताया आवेदक विनोद सिंह भदोरिया ने 5 अक्टूबर 2013 को लोकायुक्त संगठन ग्वालियर में उपस्थित होकर एक शिकायती आवेदन पेश किया था जिसमे लोकायुक्त द्वारा कार्यवाही उपरांत अभियुक्त नागेन्द्र सिंह उपनिरीक्षक एवं सह अभियुक्त तत्कालीन टीआई निर्मल जैन द्वारा रामजीए और लल्ला उर्फ कौशलेन्द्र को अवैध निरोध से छोड़ने के लिए पहले ढाई लाख रू और फिर दो लाख रू रिश्वत की मांग किये जाने का अपराधिक कृत्य किया। दोनों अभियुक्तों ेने सहमत होकर अपराधिक षडयंत्र किये जाने और इस संबंध में नागेन्द्र सिंह द्वारा की गई रिश्वत की मांग के अपराधिक कृत्य के दण्ड से उसे बचाने के लिए थाना जनकगंज के रोजनामचा सान्हा में असत्य प्रविष्टियां की गई। आरोपियों द्वारा रिश्वत की राशि की मांग किये जाने पर अभियुक्त नागेन्द्र सिंह के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवरण अधिनियम 1988 की धारा 7 तथा नागेन्द्र सिंह एवं निर्मल जैन के विरूद्ध धारा 120बी और 201 आईण्पीण् सी का अपराध किया जाना अभियोजन ने सफलतापूर्वक प्रमाणित किया है। लिहाजा दोनों को सजा सुनाई गई।

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