May 27, 2022
सामाजिक समरसता को अक्षुण्ण बनाए रखने में रामचरितमानस का विशेष योगदान -उषा ठाकुर

सामाजिक समरसता को अक्षुण्ण बनाए रखने में रामचरितमानस का विशेष योगदान -उषा ठाकुर

संस्कृति मंत्री के मुख्य आतिथ्य में “श्रीराम कथा साहित्य एवं समरसता के बहुपक्ष” विषय पर
संभाग स्तरीय कार्यशाला आयोजित

अयोध्या काण्ड पर होगी राज्य स्तरीय सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता

ग्वालियर। संस्कृति, पर्यटन एवं आध्यात्म मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने कहा है कि रामचरितमानस सही मायने में हमें सामाजिक समरसता का पाठ पढ़ाती है, इसमें मानव की समस्त समस्याओं का समाधान समाहित है। सामाजिक समरसता को अक्षुण्ण बनाए रखने में रामचरितमानस से बेहतर योगदान कोई नहीं दे सकता। रामचरितमानस को आदर्श मान लें तो समस्त व्यवस्थायें स्वत: ही आदर्श हो जायेंगीं। सुश्री उषा ठाकुर “श्रीराम कथा साहित्य एवं समरसता के बहुपक्ष” विषय पर आयोजित हुई संभागीय कार्यशाला के प्रतिभागियों को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी उपस्थित थे।
राज्य शासन के संस्कृति विभाग द्वारा रामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड पर प्रस्तावित राज्य स्तरीय सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के सिलसिले में संस्कृति विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग एवं तुलसी मानस प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को यहाँ भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान (आईआईटीटीएम) में इस संभाग स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पूर्व सांसद एवं तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्याध्यक्ष रघुनंदन शर्मा, तुलसी मानस प्रतिष्ठान के संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र शर्मा, कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, राज्य ओपन स्कूल के निदेशक पी आर तिवारी, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण आर के उपाध्याय, कार्यक्रम के समन्वयक सुरेन्द्र विरहे तथा तीर्थ एवं मेला प्राधिकरण मध्यप्रदेश के सीईओ राजेश श्रीवास्तव, जिला शिक्षा अधिकारी विकास जोशी व डीपीसी रविन्द्र तोमर मौजूद थे। कार्यशाला में संभाग के विभिन्न जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी एवं विद्यालयों के प्राचार्यों ने सहभागिता की।
संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने कहा कि रामचरितमानस भारतीय संस्कृति एवं जनमानस की रीढ़ है। इसका हर अध्याय सामाजिक समरसता की सीख देता है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में रामचरितमानस की शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत है, जिससे युवा पीढ़ी देश की संस्कृति एवं राष्ट्र निर्माण की खातिर सजग प्रहरी के रूप में खड़ी हो सके। सुश्री ठाकुर ने कहा कि आजादी के 75वे वर्ष में इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग ने अयोध्याकाण्ड पर प्रतियोगिता आयोजित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि अभी तक हम राम को सुनते आए हैं। अगर हम राम की सुनने लगें तो श्रेष्ठ समाज और राष्ट्र का निर्माण हो सके।
पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने कहा कि रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ भर नहीं, उसमें श्रेष्ठ जीवन जीने की पद्धति एवं संस्कार समाहित हैं। आज्ञा पालन का अनुपम उदाहरण हमें रामचरितमानस में मिलता है। उन्होंने अयोध्याकाण्ड के महत्व एवं इस पर आधारित प्रतियोगिता के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। साथ ही प्रतियोगिता के नियम भी बताए।
कलेक्टर ने कहा कि भारतवासियों के व्यक्तित्व निर्माण में रामचरितमानस का अहम योगदान रहा है। उम्मीद तथा विश्वास से भरा हुआ रामचरितमानस का हर भाग कठिन से कठिन परिस्थितियों में मनुष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कार्यशाला में मौजूद प्राचार्यों का आह्वान किया कि रामचरितमानस को एक पाठ की तरह न पढ़ाते हुए बच्चों को इस प्रकार से बताया जाए जिससे वे राम के चरित्र को अपने में आत्मसात कर सकें। कलेक्टर श्री सिंह ने राम-केवट संवाद, राम वन गमन सहित रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का उदाहरण देकर मित्रता, आज्ञा पालन व सामाजिक समरसता को रेखांकित किया।
तुलसी मानस प्रतिष्ठान के संयोजक राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि रामचरितमानस को जन-जन तक पहुँचाकर श्रेष्ठ समाज का निर्माण करने में सभी सहभागी बनें। इससे सही मायने में आजादी के अमृत महोत्सव की सार्थकता भी सिद्ध होगी।
राज्य ओपन स्कूल के संचालक पी आर तिवारी ने अयोध्याकाण्ड पर आयोजित होने जा रही प्रतियोगिता के नियमों एवं उसकी प्रक्रिया के बारे में पॉवर पॉइंट प्रजेण्टेशन के जरिए विस्तारूपूर्वक जानकारी दी। कार्यशाला का संचालन तुलसी मानस प्रतिष्ठान के सचिव डॉक्टर देवेंद्र रावत द्वारा किया गया । आरंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।

विजेताओं को हवाई यात्रा से कराए जायेंगे रामलला व अयोध्या दर्शन
संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने कार्यशाला में जानकारी दी कि अयोध्याकाण्ड विषय पर दो श्रेणी में प्रतियोगिता होगी। विद्यार्थियों की श्रेणी में प्रदेश के हर जिले से 4 – 4 विद्यार्थियों एवं शिक्षक व पालक श्रेणी के 4 – 4 विजेताओं को हवाई यात्रा के जरिए अयोध्या एवं रामलला के दर्शन कराए जायेंगे।

21 अगस्त को होगी प्रतियोगिता, आवेदन ऑनलाइन भरे जा सकेंगे

रामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड पर प्रतियोगिता 21 अगस्त को प्रात: 8 बजे से साय 8 बजे तक 1.30 -1. 30 घंटे के स्लॉट में होगी। इसके लिए Anandkdhaam.com पर पंजीयन कर 2 श्रेणियो में शामिल हुआ जा सकता है जिसमे पहली श्रेणी कक्षा 9 – 12 के बच्चों के लिए एवम दूसरी श्रेणी अन्य सभी के लिए है । पंजीयन शुल्क 101 रुपए एवम आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई है

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