May 27, 2022
कांग्रेस ने छीना पिछड़ा वर्ग का आरक्षण

कांग्रेस ने छीना पिछड़ा वर्ग का आरक्षण

कांग्रेस की असलियत लोगों के सामने आई-रावत,
हम आरक्षण के मुद्दे पर गंभीर, पिछड़ा वर्ग को आरक्षण मिले इसके प्रयास शुरू-तोमर
ग्वालियर। भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि आगामी स्थानीय निकाय एवं पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिया जाए। इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ओबीसी आरक्षण को लेकर दिए गए फैसले पर पुनर्विचार कर संशोधन के लिए आवेदन प्रस्तुत कर दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय से यह आग्रह किया गया है कि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ ही संपन्न कराए जाने के लिए निर्देश प्रदान करें। कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण पिछड़ा वर्ग आरक्षण से वंचित हो गया है। कांग्रेस पहले भी नहीं चाहती थी कि स्थानीय निकाय के चुनाव संपन्न होए इसलिए किसी न किसी बहाने कांग्रेस इसमें अडंगा लगाती रही है। कांग्रेस ने ओबीसी हितों को कुचलने का काम किया है।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री रणवीर सिंह रावत, बिजली मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद विवेक शेजवलकर, जिलाध्यक्ष कमल माखीजानी ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में यह बात कही। ओबीसी आरक्षण के मामले में कांग्रेस का असली चरित्र और चेहरा सामने आ गया है। रावत ने कहा कि मध्यप्रदेश में स्थानीय निकाय के चुनाव मे 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के साथ कराए जाने की प्रक्रिया चल रही थी। भाजपा सरकार ने इसी आधार पर वार्ड परिसीमनए वार्डों का आरक्षणए महापौर तथा अध्यक्ष का आरक्षण सहित मतदाता सूचिया तैयार कर ली थी। ओबीसी सहित अन्य उम्मीदवारों ने अपने नामांकन तक दाखिल कर दिए थेए लेकिन चुनाव में ओबीसी को आरक्षण का लाभ न मिले इसके लिए कांग्रेस हाईकोर्ट एवं सर्वोच्च न्यायालय पहुंचीए इस कारण वर्तमान हालात बनें हैं। कांग्रेस ने अपने याचिकाकर्ता मनमोहन नागरए जया ठाकुर व सैयद जाफर के माध्यम से यह याचिका प्रस्तुत की थीं। उन्होंने कहा कि

रावत प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने आयोग बनाकर 600 पेज की जो रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की है उसमें प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आर्थिकए सामाजिकए राजनैतिक परिस्थितियों के साथ एरियावाइज संख्या के आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि प्रदेश में ओबीसी मतदाताओं की संख्या 48 प्रतिशत से अधिक है।
आयोग ने स्पष्ट किया था कि पंचायत चुनाव व स्थानीय निकाय चुनाव में कम से कम 35 प्रतिशत स्थान आरक्षित होना चाहिए।
बिजीली मंत्री तोमर ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने पिछड़ा वर्ग का सबसे ज्यादा अहित किया। कमलनाथ सरकार ने 8 जुलाई 2019 को मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग आरक्षण संशोधन विधेयक में भ्रामक और असत्य आंकड़ा पेश कर कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग की प्रदेश में कुल आबादी 27 प्रतिशत है। कांग्रेस का यह ओबीसी आरक्षण विरोधी चेहरा दस्तावेजों में देखा जा सकता है। नगरीय निकाय के चुनाव नवंबर 2019 में होना तय थे लेकिन कांग्रेस ने यह चुनाव नहीं कराए। कांग्रेस ने पराजय के डर से चुनाव ही टाल दिए।
भाजपा ने कोरोना काल में भी चुनाव कराए जाने की कार्यवाही पूरी कर ली थीए जिसमें 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना था। वहीं दूसरी ओर कमलनाथ सरकार ने अपने कार्यकाल में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं लेने दिया। भाजपा ने सरकार में आते ही ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया ।
भाजपा ने वर्ष 2004 से लगातार अन्य पिछड़ा वर्ग के तीन मुख्यमंत्री प्रदेश को दिए। मंत्रिमंडल में भी ओबीसी को पर्याप्त स्थान दिया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने ओबीसी की केन्द्रीय सूची का दर्जा बढ़ाकर सूची को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया और इसमें परिवर्तन करने के लिए संसद को शक्ति प्रदान की। संविधान संशोधन अधिनियम 2018 राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया। इस अवसर पर मीडिया जिला प्रभारी मुरारीलाल मित्तल, पिछडा वर्ग मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुशील वर्मा, पवन कुमार सेन, भरत दांतरे सहित अन्य नेता भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जो कि पिछड़ा वर्ग से आते हैं सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद तत्काल दिल्ली जाकर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में संशोधन के लिए आवेदन प्रस्तुत करने सोलिसीटर जनरल से चर्चा कीए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है कि आगामी चुनाव में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का लाभ मिले।
रावत ने कहा कि भाजपा का मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में संशोधन जरूरी है जिससे कि वर्ष 2022 में नया परिसीमन त्रिस्तरीय पंचायतों का किया गया है तथा वर्ष 2019 से 2022 के मध्य 35 नये नगरीय निकाय गठित हुए हैंए इन नगरीय निकायों में ग्रामीण क्षेत्र से 128 ग्राम पंचायतें तथा उनके 297 ग्राम नगरीय निकायों में चले गये हैंए जबकि उच्चतम न्यायालय के आदेश में वर्ष 2019 में त्रिस्तरीय पंचायतों के परिसीमन के आधार पर चुनाव कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कारण कई विसंगतियां उत्पन्न होंगी। इसलिए चुनाव नए परिसीमन के अनुसार ही कराए जाना आवश्यक है। भाजपा शीघ्र चुनाव कराना चाहती है तथा इसके लिए निरंतर प्रयासरत है । हम आंकडों से न्यायालय को संतुष्ट करेंगे जिससे कि चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ संपन्न हो।

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