May 27, 2022
रामचरित मानस के अयोध्या काण्ड पर होगी ऑनलाइन परीक्षा प्रतियोगिता

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भारतीय संस्कृति से स्वयं परिचित हों और सम्पूर्ण विश्व को परिचित कराएँ – सुश्री उषा ठाकुर
संस्कृति मंत्री सुश्री ठाकुर ने संगीत एवं कला विश्वविद्याल में दिया व्याख्यान

ग्वालियर। हम सब समृद्ध एवं गौरवशाली संस्कृति के प्रतिनिधि हैं। विश्व वर्तमान में जिन परेशानियों से जूझ रहा है उन सबका समाधान हमारे ग्रंथों एवं संस्कृति में पहले से ही उपलब्ध है। विद्यार्थी भारतीय संस्कृति की खूबियों से स्वयं परिचित हों और सारी दुनिया को भी परिचित कराएँ, जिससे भारत विश्व में पुन: विश्व गुरू के रूप में स्थापित हो सके। इस आशय के विचार प्रदेश की संस्कृति, पर्यटन व अध्यात्म विभाग की मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने व्यक्त किए।
मंत्री सुश्री उषा ठाकुर बुधवार को यहाँ राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में “भारतीय संस्कृति में विविध ललित कलाओं का महत्व” विषय पर आयोजित हुए कार्यक्रम में अपना व्याख्यान दे रही थीं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पण्डित साहित्य कुमार नाहर व कुलसचिव दिनेश पाठक, विश्वविद्यालय के आचार्य एवं विद्यार्थी मौजूद थे।
संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने कहा कि समृद्ध भारतीय संस्कृति एवं वैज्ञानिक कसौटी पर खरे उतरने वाले ग्रंथों की वजह से ही सम्पूर्ण विश्व में हमारी पूजा होती थी। इस सच्चाई को सभी के सामने लाने की जरूरत है। उन्होंने इस अवसर पर विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपनी कालजयी संस्कृति को समझकर अपने वर्तमान को सँवारें। साथ ही पूरे विश्व में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का परचम लहराएँ।
सुश्री उषा ठाकुर ने कहा कि विद्यार्थी राष्ट्र की रीढ़ होते हैं। उनका समर्पण ही राष्ट्र का निर्माण करता है। सराहनीय बात है कि तकनीकी दौर में आप सब ने ललित कलाओं को चुना है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता का निर्धारण किसी व्यक्ति की वेशभूषा से अपितु उसके विचारों एवं कार्यशैली से होता है। इसलिए आप सब अपने को सतही नहीं वास्तविक रूप से आधुनिक बनाएँ। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से वैदिक ग्रंथों का अध्ययन करने का आह्वान भी किया।
आरंभ में मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने दीप प्रज्ज्वलित कर व्याख्यान सत्र का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने कर्णप्रिय सरस्वती वंदना व मनोहारी विश्वविद्यालय के कुलगीत की संगीतमय प्रस्तुति दी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पंडित साहित्य कुमार नाहर ने स्वागत उदबोधन किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से वर्तमान में 123 संगीत एवं कला महाविद्यालय संबद्ध हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला।

अमूर्त धरोहरों को भी यूनेस्को की सूची में शामिल कराने के प्रयास करें

इस अवसर पर संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने कहा कि संस्कृति का संरक्षण व संवर्धन करना सरकार के साथ-साथ हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वैज्ञानिकता पर खरी उतरने वाली भारतीय संस्कृति की अमूर्त धरोहरों को भी विश्व रिकॉर्ड बनाकर यूनेस्को की धरोहर सूची में शामिल कराने के लिये साझा प्रयास करें। उन्होंने खासतौर पर प्राचीन भारतीय ग्रंथों की ऋचाओं की ओर ध्यान आकर्षिक किया। सुश्री उषा ठाकुर ने कार्यक्रम में सप्तशती का सुमधुर गायन भी इस अवसर पर किया। #विश्वविद्यालय की उन्नति के लिये हर संभव सुविधाएं मुहैया कराई जायेंगीं

बुधवार को ग्वालियर प्रवास पर पहुँचीं संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों का जायजा लिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के गायन-वादन, चित्रकला, नृत्य, मूर्तिकला, एनीमेशन, नाटक, कथक व भरतनाट्यम, पुस्तकालय, लेखा शाखा व कुलपति सचिवालय का अवलोकन किया।

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